बालकांड दोहा 361
चौपाई :बामदेव रघुकुल गुर ग्यानी। बहुरि गाधिसुत कथा बखानी॥सुनि मुनि सुजसु मनहिं मन राऊ। बरनत आपन पुन्य प्रभाऊ॥1॥ भावार्थ:- वामदेवजी और रघुकुल के गुरु ज्ञानी वशिष्ठजी ने फिर विश्वामित्रजी की कथा बखानकर कही। मुनि का सुंदर यश सुनकर राजा मन…