Bhakti Sagar

अनंत भक्ति · शाश्वत ज्ञान

सर्वे भवन्तु सुखिनः · सर्वे सन्तु निरामयाः
Bhagvad Gita

अध्याय 1 श्लोक 1 - 4 - Bhagavad Gita In Hindi

अध्याय 1 श्लोक 4इस सेना में भीम तथा अर्जुन के समान युद्ध करने वाले अनेक वीर धनुर्धर हैं - यथा महारथी युयुधान, विराट तथा द्रुपद । अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण श्लोक 1 . 4अत्र श्रूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा…

15 Feb 2025 • 122 • 1 min read
Bhagvad Gita

अध्याय 1 श्लोक 1 - 3 - Bhagavad Gita In Hindi

अध्याय 1 श्लोक 1 - 3 - Bhagavad Gita In Hindiहे आचार्य! पाण्डुपुत्रों की विशाल सेना को देखें, जिसे आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपद के पुत्र ने इतने कौशल से व्यवस्थित किया है । अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण…

15 Feb 2025 • 104 • 2 min read
Bhagvad Gita

अध्याय 1 श्लोक 1 - 2 - Bhagavad Gita In Hindi

अध्याय 1 श्लोक 2संजय ने कहा - हे राजन! पाण्डुपुत्रों द्वारा सेना की व्यूहरचना देखकर राजा दुर्योधन अपने गुरु के पास गया और उसने ये शब्द कहे । अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण श्लोक 1 . 2सञ्जय उवाचदृष्ट्वा…

29 Dec 2024 • 90 • 2 min read

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Bhagvad Gita

अध्याय 1 श्लोक 1 - Bhagavad Gita In Hindi

अध्याय 1 श्लोक 1धृतराष्ट्र ने कहा -- हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे तथा पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया ?अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण श्लोक 1 . 1धृतराष्ट्र उवाचधर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता…

29 Dec 2024 • 114 • 4 min read
Uttar Kand

उत्तर काण्ड दोहा 07

चौपाई :सासुन्ह सबनि मिली बैदेही । चरनन्हि लाग हरषु अति तेही॥देहिं असीस बूझि कुसलाता। होइ अचल तुम्हार अहिवाता॥1॥ भावार्थ:- जानकीजी सब सासुओं से मिलीं और उनके चरणों में लगकर उन्हें अत्यंत हर्ष हुआ। सासुएँ कुशल पूछकर आशीष दे रही हैं…

30 Jun 2024 • 154 • 2 min read
Uttar Kand

उत्तर काण्ड दोहा 06

चौपाई :भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे॥सीता चरन भरत सिरु नावा। अनुज समेत परम सुख पावा॥1॥ भावार्थ:- फिर लक्ष्मणजी शत्रुघ्नजी से गले लगकर मिले और इस प्रकार विरह से उत्पन्न दुःसह दुःख का नाश किया। फिर भाई…

30 Jun 2024 • 147 • 3 min read
Uttar Kand

उत्तर काण्ड दोहा 05

चौपाई :आए भरत संग सब लोगा। कृस तन श्रीरघुबीर बियोगा॥बामदेव बसिष्ट मुनिनायक। देखे प्रभु महि धरि धनु सायक॥1॥ भावार्थ:- भरतजी के साथ सब लोग आए। श्री रघुवीर के वियोग से सबके शरीर दुबले हो रहे हैं। प्रभु ने वामदेव, वशिष्ठ…

30 Jun 2024 • 170 • 3 min read
Uttar Kand

उत्तर काण्ड दोहा 04

चौपाई :इहाँ भानुकुल कमल दिवाकर। कपिन्ह देखावत नगर मनोहर॥सुनु कपीस अंगद लंकेसा। पावन पुरी रुचिर यह देसा॥1॥ भावार्थ:- यहाँ (विमान पर से) सूर्य कुल रूपी कमल को प्रफुल्लित करने वाले सूर्य श्री रामजी वानरों को मनोहर नगर दिखला रहे हैं।…

30 Jun 2024 • 144 • 2 min read
Uttar Kand

उत्तर काण्ड दोहा 03

चौपाई :हरषि भरत कोसलपुर आए। समाचार सब गुरहि सुनाए॥पुनि मंदिर महँ बात जनाई। आवत नगर कुसल रघुराई॥1॥ भावार्थ:- इधर भरतजी भी हर्षित होकर अयोध्यापुरी में आए और उन्होंने गुरुजी को सब समाचार सुनाया! फिर राजमहल में खबर जनाई कि श्री…

30 Jun 2024 • 103 • 3 min read
Uttar Kand

उत्तर काण्ड दोहा 02

चौपाई :देखत हनूमान अति हरषेउ। पुलक गात लोचन जल बरषेउ॥मन महँ बहुत भाँति सुख मानी। बोलेउ श्रवन सुधा सम बानी॥1॥भावार्थ:- उन्हें देखते ही हनुमान्‌जी अत्यंत हर्षित हुए। उनका शरीर पुलकित हो गया, नेत्रों से (प्रेमाश्रुओं का) जल बरसने लगा। मन…

30 Jun 2024 • 135 • 4 min read
Uttar Kand

उत्तर काण्ड दोहा 01

चौपाई :रहेउ एक दिन अवधि अधारा। समुझत मन दुख भयउ अपारा॥कारन कवन नाथ नहिं आयउ। जानि कुटिल किधौं मोहि बिसरायउ॥1॥भावार्थ:- प्राणों की आधार रूप अवधि का एक ही दिन शेष रह गया। यह सोचते ही भरतजी के मन में अपार…

30 Jun 2024 • 98 • 2 min read
Uttar Kand

उत्तरकांड शुरुआत श्लोक

श्रीगणेशायनमःश्रीजानकीवल्लभो विजयतेश्रीरामचरितमानससप्तम सोपानश्री उत्तरकाण्डश्लोक :केकीकण्ठाभनीलं सुरवरविलसद्विप्रपादाब्जचिह्नंशोभाढ्यं पीतवस्त्रं सरसिजनयनं सर्वदा सुप्रसन्नम्‌।पाणौ नाराचचापं कपिनिकरयुतं बन्धुना सेव्यमानं।नौमीड्यं जानकीशं रघुवरमनिशं पुष्पकारूढरामम्‌॥1।भावार्थ:- मोर के कण्ठ की आभा के समान (हरिताभ) नीलवर्ण, देवताओं में श्रेष्ठ, ब्राह्मण (भृगुजी) के चरणकमल के चिह्न से सुशोभित, शोभा से पूर्ण,…

30 Jun 2024 • 192 • 2 min read